अदालत में कसम खाने की यह प्रथा स्वतंत्र भारत में कब से सुरुवात हुई !!


भारत में गीता पर हाथ रखकर कसम खाने की परंपरा कब शुरू हुई ?

कोर्ट में धार्मिक पुस्तक पर हाथ रख कर शपथ लेने का नियम कब बना ?

मुगलों और समकक्ष शासनकाल तक गीता पर हाथ रखकर शपथ उठाने की प्रक्रिया एक दरबारी प्रथा थी इसके लिए कोई कानून नहीं था लेकिन अंग्रेजों ने इसे कानूनी जामा पहना दिया और इंडियन ओथ्स एक्ट, 1873 पास किया और सभी अदालतों में लागू कर दिया गया था। इस एक्ट के तहत हिंदू संप्रदाय के लोग गीता पर और मुस्लिम संप्रदाय के लोग कुरान पर हाथ रखकर कसम खाते थे। ईसाइयों के लिए बाइबल सुनिश्चित की गई थी।

 कोर्ट में क़सम खाने की यह प्रथा स्वतंत्र भारत में 1957 तक कुछ शाही युग की अदालतों, जैसे बॉम्बे हाईकोर्ट में नॉन हिन्दू और नॉन मुस्लिम्स के लिए उनकी पवित्र किताब पर हाथ रखकर कसम खाने की प्रथा चालू थी।

यहाँ पर यह बताना जरूरी है कि नए ओथ एक्ट,1969' में यह भी प्रावधान है कि यदि गवाह, 12 साल से कम उम्र का है तो उसे किसी प्रकार की शपथ नहीं लेनी होगी क्योंकि ऐसा माना जाता है कि बच्चे स्वयं भगवान के रूप होते हैं।

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